जीवन का सार जब किताबों में मिलता है आपाधापी में क्यों फिर सिर खपता है । जीवन का सार जब किताबों में मिलता है आपाधापी में क्यों फिर सिर खपता है ।
मिला नहीं चरागा़ं कोई गुमनामी के अंधेरो में मिला नहीं चरागा़ं कोई गुमनामी के अंधेरो में
बरसों से इश्क किया तुमसे तुम बादल बनके बरस जाना बैचेन निगाहें तरस ही गई फिर हर पल मिलना तुम मुझसे... बरसों से इश्क किया तुमसे तुम बादल बनके बरस जाना बैचेन निगाहें तरस ही गई फिर ह...
भोर होने से पहले हर रोज तेरे दर्शन पाऊँ। भोर होने से पहले हर रोज तेरे दर्शन पाऊँ।
कोइ नहीं भाता था इस दिल को तेरी ही यादों में हर दम डुबे होते थे। कोइ नहीं भाता था इस दिल को तेरी ही यादों में हर दम डुबे होते थे।
बेबाक मन की ही करती नहीं ढूँढती अब कोई सहारा मेरी कलम जीवन भर का आसरा। बेबाक मन की ही करती नहीं ढूँढती अब कोई सहारा मेरी कलम जीवन भर का आसरा।